Top 5 Wested Telent Of Indian Cricket- गजब के टेलेंट जो बर्बाद हो गए !

दोस्तों भारत में क्रिकेट का क्रेज लोगों के सर चढ़कर बोलता है, शायद हमारा देश विश्व का एकमात्र देश होगा जहाँ क्रिकेट को एक धर्म क्रिकेटर्स को भगवान की तरह पूजा जाता है लगभग हर दूसरा व्यक्ति क्रिकेटर्स बनने का ख्वाब देखता है यही कारण है कि यह बहुत ही अधिक मात्रा में टैलेंट पाया जाता है! लेकिन कभी कभी ये अत्यधिक विकल्पों की समस्या भी एक लगती है क्योंकि प्लेइंग इलेवन में पूरे देश से ग्याराही खिलाड़ी खेल पाते हैं जिसके चलते बाकी खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पाता और कभी कभी ना चाहते हुए भी चयनकर्ताओं को ऐसे कमाल के खिलाड़ियों को नज़रअन्दाज़ और टीम से बाहर करना पड़ता है!जो किसी ना किसी अद्भुत क्षमता और टैलेंट से लबालब भरे होते हैं और उनके डोमेस्टिक सर्किट में रिकॉर्ड भी काफी अच्छे होते हैं आज हम उन खिलाड़ियों से परिचित करवाएंगे जो कमाल का टैलेंट रखते थे एक बड़ा करिअर डिज़र्व करते थे, मगर दुर्भाग्यवश जाने अनजाने में भारतीय चयनकर्ताओं ने उनके करियर का सत्यानाश कर दिया ना ही अधिक मौके दिए और फिर अचानक से टीम से बाहर कर दिया इससे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से गुमनाम हो गए! तो आइए जानते है Top 5 Wested Telent Of Indian Cricket- गजब के टेलेंट जो बर्बाद हो गए! उन खिलाड़ियों के बारे मै!
Murali kartik

और हमारी इस लिस्ट में पहले नंबर पर है मुरली कार्तिक जैसे मुरली कार्तिक भारत के उन नायाब हीरो में से एक थे जिन्हें कभी तराशा ही नहीं गया, ना ही कभी उन्हें वो पर्याप्त सपोर्ट और बैंकिंग मिली जिससे उनका कैरिअर आगे बढ़ पाता ये और कुछ नहीं तो उनकी बदकिस्मती ही थी उनकी गलती केवल इतनी थी कि वो एक ऐसे गलत दौर का हिस्सा थे जब भारत के पास अनिल कुंबले और हरभजन सिंह जैसे दो फ्रंटलाइन स्पिनर मौजूद थे और भारत को तब दरकार थी अपनी तेज गेंदबाजी मजबूत करने की वरना छे सौ से भी अधिक फर्स्ट क्लास विकेट लेने वाले गेंदबाज का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी एक सुनहरा भविष्य माना जाता है कार्तिक हवा में ही गेंद को फ्लाइट के साथ ड्रिफ्ट कराने में माहिर थे इससे काफी बल्लेबाज खेल नहीं पाते थे साथ ही मैं निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी थे मगर इसके बावजूद उन्हें काफी कम मौके मिले पर जीतने भी मौके मिले उन्होंने इसमें कई यादगार मैच विनिंग कर प्रभावित किया चाहे वो 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ टेस्ट हो जब भारत ने कंगारुओं को मात्र तिरानवे पर समेटकर ना जीता हो गया 2007 सात में वर्ल्ड चैंपियन टीम के खिलाफ़ उनकी बीस तक उनके छह विकेट ने कंगारुओं को हिलाकर रख दिया उस वक्त कार्तिक अपने प्राइम में थे, उन्होंने अपने सटीक लाइन लेंथ पर कमाल की टर्न कराने की अपनी कला के दम पर एक अलग पहचान बनाई मगर दुख की बात है की इतना टैलेंटेड होने के बावजूद उन्हें कभी भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में पक्का स्थान नहीं मिला वरना इस घातक स्पेल के नाम भी चार सौ पांच सौ इंटरनेशनल, एक महान खिलाड़ी बनने की क्षमता और एक हुनरबाज क्रिकेटर्स जो हर फॉर्मेट में खतरनाक था इसके बावजूद भी कुछ खास कमाल नहीं कर सके क्योंकि ने आठ टेस्ट सैंतीस एकदिवसीय और एक मुकाबले में मिली रस्सी पहनने का मौका मिला!
Wasim jaffer

और हमारी इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं वसीम जाफर दोस्तों इस बात से तो हम सब अवगत हैं की क्रिकेट का भगवान सचिन तेन्दुलकर को माना जाता है उनका कद क्रिकेट में कितना ऊंचा है ये तो किसी से छिपा नहीं है और इस खिलाड़ी को उनसे कंपेर किया जाए उसमें कुछ तो खास बात जरूर होगी, लेकिन इस बल्लेबाज का रुतबा ही इतना हो उन्हें घरेलू क्रिकेट का सचिन ही घोषित कर दिया गया हो उसकी काबिलियत पर तो कभी शक नहीं किया जा सकता मगर वसीम जाफर भारत के वो बदनसीब क्रिकेटर्स थे जो डोमेस्टिक सर्किट में तो दो दशक छाये रहे रणजी ट्रोफ़ी इतिहास की हाइएस्ट रन ग्रेटर है मगर जब इस सितारे की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने की बारी आयी तो इसे वो नहीं मिल सका जिसमें दुनिया इस जुझारू बल्लेबाज का टैलेंट अच्छे से देख पाती घरेलू क्रिकेट में कोहराम मच आने वाले जाफर ने गज की पट्टी पर अपना जलवा बिखेरा लेकिन जब टीम में सहवाग, गंभीर और गर्वित जैसे महान बल्लेबाज ओपनिंग के प्रमुख दावेदार थे तो जाफरी की कमाल की तकनीकी शांति से टिक कर खेलने की कला और सिंह उछाल वाली पिचों पर क्लासिक स्ट्रोकप्ले से भरी क्लास भी उन्हें बड़ा मन से दिलाने में असफल रही है और कुछ मुकाबलों के बाद ये खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर से ओझल हो गया लेकिन अपने छोटे करिअर और मिले कम अवसरों में बढ़िया प्रदर्शन करने के बावजूद भी उन्हें टीम से बाहर क्यों कर दिया गया और फिर दोबारा कभी भी रणजी में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले जाफ़र को क्यों कभी टीम में शामिल नहीं किया गया इसका जवाब तो शायद चयनकर्ताओं के पास भी नहीं है उनके समुचित करियर कार्य कारण आउट साइड ऑफ स्टम्प पर आती गई थी और कहीं जफर ने काफी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला और उन दिनों इतने तेज गेंदबाज देखने को नहीं मिलते थे तो जाफ़र को एक्सप्रेस बॉलर्स को खेलने में दिक्कत भी होती थी जो कि कई मौकों पर एक सपोज़ हुई लेकिन एक खिलाड़ी में निखार तभी आता है जब उसे पर्याप्त मौके मिलेंगे क्योंकि जाफर को कभी नहीं मिले उनकी केवल घरेलू क्रिकेट में ही उभरी और वही अपना दम तोड़ गई या फिर को भारत से केवल इकतीस टेस्ट और दो एकदिवसीय खेलने को मिले और अपने करियर के सबसे सुनहरे दौर में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया जो इस होनहार खिलाड़ी के साथ घोर अन्याय था !
Robin uthappa

हमारी इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं रॉबिन उथप्पा दो हज़ार चौदह में श्रीलंका के खिलाफ़ रोहित शर्मा के दो सौ चौंसठ रन की पारी तो आप सबको याद ही होगी मगर वो मुकाबला किसी भारतीय खिलाड़ी के करियर का आखिरी मुकाबला भी था क्यों किसी को ध्यान नहीं है वो खिलाड़ी जिसने उस समय पर रोहित शर्मा को सिंगल दे देकर निस्वार्थ भाव से अपने रन बनाकर मैं दोहरा शतक बनाने में ऐसे वक्त मदद की काफी मुश्किल लग रहा था जिसे एक बार पोस्ट मैच इंटरव्यू के दौरान भारतीय कप्तान धोनी ने एक खिलाड़ी के बारे में कहा था कि वो इस वक्त भारत का सबसे वर्सेटाइल बल्लेबाज हैं चाहे ओपनिंग मध्यक्रम में बल्लेबाजी हो या फिर फिनिशिंग का ही रोल क्यों ना हो वो उसे बखूबी निभाना जानता है इससे हमारे टीम और मजबूत होती है वो खिलाड़ी थे रॉबिन उथप्पा की एक सौ पचास प्लस की गति की गेंदों को आगे से चलकर सामने के लंबे छक्के बड़ी आसानी से लगा दिया करते थे जिसके चलते उन्हें असिस्टेंट का नाम दिया गया था दो हज़ार सात टी ट्वेंटी वर्ष की विजेता टीम के सदस्य रॉबिन ने अपने पहले मैच में छियासी रनों की लाजवाब पारी खेल अंदाज़ अपने करियर की शुरुआत की मगर उसके बाद उनके कुछ फेल्यर और रोहित शर्मा, विराट कोहली जैसे शानदार बल्लेबाजों की टीम में आने से रोबी की जगह कभी टीम में दोबारा नहीं बन पाए साल बीतते गए और रोबी एक के बाद एक कभी आईपीएल तो कभी रणजी ट्राफी में जबरदस्त परफॉर्मेंस देते गए मगर और नए युवा खिलाड़ियों का आगमन और चयन करता हूँ की बेपरवाही से इसे स्टाइलिश टैलेंटेड बैट्समैन का करिअर कमबैक किया उसमें ही घुट घुटकर खत्म हो गया और दुनिया के शायद ! तो तेरे से खिलाड़ी होंगे जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए अपनी पूरी तकनीकी बदलकर रख दी थी उनका ख्वाब था सफेद जर्सी में भारत के लिए खेलने का जिसके लिए उन्होंने अधिक डिफेंसिव तरीके से खेलना शुरू किया, जिससे उनकी वो पहले वाले आक्रामक था, काफी हद तक कम हो गई जिसके बाद चयनकर्ताओं उनकी तरफ देखना भी बंद कर दिया भले ही उन्होंने रणजी ट्रोफ़ी दिलीप ट्रोफ़ी में रनों का अंबार लगाया हो लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें कभी भी टेस्ट क्रिकेट में मौका नहीं मिल पाया और बढ़ती उम्र ने भी उनके कमबैक की संभावनायें खत्म कर दी हाल ही में उन्होंने क्रिकेट के हर फॉर्मेट से संन्यास ले लिया और अब दुनिया ने एक बात का किया ये कैसा मैच विनर गजब का टैलेंट बल्लेबाज पूरी तरह से नज़रअन्दाज़ और वेस्ट कर दिया गया उन्हें मात्र छियालीस एकदिवसीय और तेरह टी ट्वेंटी में खेलने का मौका मिला जो कि साहब दर्शाता है कि चयनकर्ताओं ने किस बेरहमी से इस टैलेंट को बर्बाद कर दिया!
Yusuf Pathan

हमारी इस लिस्ट में अगले नंबर पर है यूसुफ पठान यूसुफ पठान दुनिया के उन ताकतवर खिलाड़ियों में शुमार थे,जिनके मिसटाइम शॉट थी सीमा रेखा के पार जाते थे अपनी भूमिका और हार्ड हिटिंग लगाने की क्षमता वाले इस खिलाड़ी कई बार अपनी टीम को फसे मैच जिताए और कई यादगार पारियां खेली फिर चाहे वो उनका आईपीएल में 30 गेंद में ताबड़तोड़ शतक हो या फिर 2010 में उनकी 108 और दो 100 रन की लाजवाब पारी है,अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस खिलाड़ी का बल्ला खूब चला उनका पहला मैच ही वर्ल्ड कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ़ जब उन्होंने आसिफ को छक्का लगाकर एक खतरनाक बल्लेबाज होने का संकेत दिया इसके अलावा काफी बढ़िया ऑफ ऑनर भी थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गहरी छाप छोड़ने के बावजूद कभी उड़ान नहीं ले पाया उन्होंने भले ही दो ओडीआई शतक बनाए, मगर दोनों ही बार उन्होंने अपने दम पर विरोधी टीम की एकतरफा जीत के मंसूबों पर पानी फेर दिया था, विश्व कप 2007 और 2011 की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे, यूसुफ निश्चित तौर पर ही एक लंबे और रिकॉर्ड तोड़ करियर का हकदार था, मगर भारतीय टीम में उभरते सितारे जडेजा, रैना, हार्दिक, जैसे हरफनमौला युवा खिलाड़ियों के होते हुए, उन्हें ड्रॉप होना पडा,2012 के बाद वो कभी नीली जर्सी में दिखाई नहीं दिए और उनका करियर महज सत्तावन एकदिवसीय है और बाईस मुकाबलों में सिमट कर रह गया!
Subramaniam Badrinath

आज लिस्ट में पांचवें नंबर पर है सुब्रमण्यम बद्रीनाथ जरूरी नहीं कि हर खिलाड़ी शुरू से ही गॉड गिफ्टेड या टैलेंटेड हो मेहनत की जाए तो क्या कुछ नहीं हो सकता बद्रीनाथ उन्हीं खिलाड़ियों में से एक थे,जो ज्यादा टैलेंटेड तो नहीं थे मगर काफी जुझारू और उपयोगी थे भले ही बिग हिटिंग उनकी ताकत नहीं थी मगर संयम,स्टाइलिश स्ट्रोकप्ले और टीम को कोलैप्स से बचाने में सहायक उनका शांत स्वभाव टेम्परामेंट जिसके चलते उन्हें मिस्टर डिपेंडेबल का उपनाम मिला प्रथम श्रेणी करियर में अपने नाम दस हज़ार से विधिकरण और कई रेकॉर्ड् करने वाले बद्रीनाथ गेंदबाज पर प्रेशर बनाने और अपनी टीम के लिए हमेशा फाइट करने में सक्षम थे,आइपीएल में भी उन्होंने कई बार अपना शानदार प्रदर्शन किया मगर वो दुर्भाग्यवश उस दौर का हिस्सा थे जहाँ तेन्दुलकर सहवाग, गंभीर द्रविड़, लक्ष्मण, युवराज से सजी अपनी सुनहरी दौर में चल रही भारतीय टीम में कोई भी स्थान नही बना चाहे बात व्हाइट बॉल क्रिकेट की हो या रेड बॉल, यही कारण था कि अपने पूरे करियर में केवल इंतजार के अलावा उन्हें कुछ और नहीं मिला और टीम में अपना स्थान बनाने के लिए हमेशा तरसते रहे किसी भी खिलाड़ी के सब्र का बांध उस वक्त टूट जाता है जो लगातार चार पांच साल से रनों का पहाड़ खड़ा करने के बावजूद उसे वो मन से ना मिले ये सब से तंग आकर बद्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये तक कह दिया था भगवान के लिए कम से कम मुझे असफल होने का मौका तो दो अगर मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित नहीं कर सका तो कभी किसी से कुछ नहीं कहूंगा और खुद को किनारे कर लूँगा,वे या तो टीम स्क्वाड में सिलैक्ट ही नहीं होते अगर कभी होते भी हैं तो केवल पर बैठे रह जाते,दुनिया के ऐसे इकलौते बदनसीब खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने पहले ही में मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता और वहीं मुकाबला उनका आखिरी मैच रहा उन्होंने गलत दौर में पैदा होने की गलती खूब चुकाई और उनका अंतरराष्ट्रीय करियर केवल दस मुकाबलों में सिमट कर रह गया!
तो ये थे वो Top 5 Wested Telent Of Indian Cricket बदनसीब क्रिकेटर्स जिन्हें कभी अपने टैलेंट को दुनिया के आगे पेश करने का अवसर मिला इसके चलते जो महान खिलाड़ी की स्टडी में कभी आ ही नहीं पाए, उनका टैलेंट वेस्ट हो गया है, और गजब के टेले उम्मीद करते हैं की आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होगी वीडियोग्राफी अच्छी लगी हो तो प्लीज़ इसे लाइक करें शेर करे!

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